सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दीशा सलियान मृत्यु मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के जज के खिलाफ टिप्पणियों के लिए वकील नीलेश ओझा की अवमानना कार्यवाही को चुनौती देने वाली अपील खारिज कर दी। बेंच ने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में जज पर आरोप लगाना वकील के लिए अस्वीकार्य है।
सुप्रीम कोर्ट ने वकील नीलेश ओझा की अपील खारिज करते हुए कहा कि दीशा सलियान मृत्यु मामले में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर हाईकोर्ट के जज पर आरोप लगाना गंभीर मामला है। दीशा सलियान, अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर, जून 2020 में मृत पाई गई थीं। ओझा ने दीशा के पिता दिनेश सलियान का प्रतिनिधित्व किया था और 1 अप्रैल 2025 को सीबीआई जांच की याचिका से पहले जज पर टिप्पणी की थी।
जज ने बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा, जिसके बाद ओझा को शो-कॉज नोटिस जारी हुआ। उनके जवाब में और अपमानजनक टिप्पणियां होने पर हाईकोर्ट ने आपराधिक अवमानना कार्यवाही दर्ज की। ओझा ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने कहा, "प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर जज पर आरोप लगाना वकील की नैतिक जिम्मेदारी के विपरीत है।" जस्टिस मेहता ने लिखा, "वकील को न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने का विशेष कर्तव्य है। ऐसी टिप्पणियां न्याय में जनता के विश्वास को कमजोर करती हैं।"
बेंच ने स्पष्ट किया कि आरोप तथ्यों या कानून की गलती तक सीमित नहीं, बल्कि जज की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हैं।