गौहाटी हाईकोर्ट की कोहिमा बेंच ने बुधवार को नागालैंड में डॉग मीट की बिक्री पर दो रिट याचिकाओं पर विभाजित फैसला सुनाया। जस्टिस बूदी हाबुंग ने याचिकाओं को खारिज कर डॉग मीट की बिक्री और खपत की अनुमति देने वाले आदेश को बरकरार रखा, जबकि जस्टिस रॉबिन फुकन ने 2023 के आदेश को रद्द कर दिया। विस्तृत आदेश का इंतजार है।
गौहाटी हाईकोर्ट की कोहिमा बेंच ने बुधवार को दो रिट अपीलों पर फैसला सुनाया। ये अपीलें 2023 और 2024 में दायर की गई थीं, जो नागालैंड सरकार के जुलाई 2020 के आदेश को चुनौती देती हैं। उस आदेश ने डॉग्स के व्यावसायिक आयात, व्यापार, डॉग बाजारों और रेस्तरां में डॉग मीट की व्यावसायिक बिक्री पर प्रतिबंध लगाया था।
पीपुल फॉर एनिमल्स (पीएफए) और ह्यूमेन सोसाइटी इंटरनेशनल/इंडिया ने 2023 में पहली अपील दायर की, जबकि अखिल भारत कृषि गो सेवा संघ ने 2024 में दूसरी। जून 2023 में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के प्रतिबंध को रद्द कर दिया था, क्योंकि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 की धारा 30 के तहत मुख्य सचिव उचित प्राधिकारी नहीं था। जस्टिस मार्ली वांकुन ने यह फैसला दिया था।
जस्टिस बूदी हाबुंग ने अपीलों को अस्वीकार कर 2023 के फैसले को बरकरार रखा। दूसरी ओर, जस्टिस रॉबिन फुकन ने अपीलें स्वीकार कर 2023 का आदेश रद्द किया। नागा समुदायों में डॉग मीट को एक स्वादिष्ट व्यंजन से अधिक माना जाता है, हालांकि कई नागा इसका सेवन नहीं करते।
2020 का प्रतिबंध आदेश व्यापारियों द्वारा सितंबर 2020 में चुनौती दिया गया था। प्रतिबंध की अधिसूचना मुख्य सचिव ने 4 जुलाई 2020 को जारी की थी। नागा लोगों से मिश्रित प्रतिक्रियाएं मिली थीं।