वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखकर दिल्ली चिड़ियाघर में पेड़ कटाई, टिकट धांधली और लापरवाही से संकटग्रस्त प्रजातियों की मौतों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। यह मांग हाल ही में एक सियार के कथित जलाने की घटना के बाद आई है, जिसकी जांच चल रही है। दुबे ने विभिन्न कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
दिल्ली चिड़ियाघर में अनियमितताओं को लेकर वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने 24 जनवरी को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखा। उन्होंने पेड़ों की अवैध कटाई, टिकटों की काली बाजारी और अप्रशिक्षित बहु-कार्य स्टाफ के उपयोग की शिकायत की, जो जानवरों के घेरों में तैनात हैं। दुबे ने कहा कि चिड़ियाघर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960, दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण दिशानिर्देशों का उल्लंघन कर रहा है।
हाल ही में, राष्ट्रीय चिड़ियाघर कर्मचारी संघ ने आरोप लगाया कि एक सियार हिमालयी काले भालू के घेरे में छिप गया था और स्टाफ ने उसे पकड़ने के लिए जिंदा जला दिया। चिड़ियाघर ने इनकार किया है, लेकिन संयुक्त निदेशक द्वारा चल रही आंतरिक जांच पर दुबे ने हितों के टकराव का आरोप लगाया। उन्होंने बाहरी एजेंसी से समयबद्ध जांच और चिड़ियाघर निदेशक तथा अन्य स्टाफ के निलंबन की मांग की।
पत्र में दुबे ने अनुसूची-I जानवरों की हालिया मौतों का जिक्र किया, जैसे कि चूहा जहर के अनधिकृत उपयोग से तीन चौसिंगा (चार-सींग वाला हिरण) की मौत। इसी तरह, भारतीय गैंडा, काला हिरण और अफ्रीकी हाथी शंकर की मौतों के लिए जवाबदेही मांगी गई। चिड़ियाघर निदेशक, सीजेडए और केंद्रीय मंत्रालय ने हिंदुस्तान टाइम्स के अनुरोध पर कोई टिप्पणी नहीं की। रिपोर्ट अगले सप्ताह आने वाली है।