दक्षिण दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में रहने वाले एक बुजुर्ग डॉक्टर दंपति को धोखेबाजों ने डिजिटल अरेस्ट के बहाने 14 करोड़ रुपये का चूना लगाया। 24 दिसंबर 2025 को फर्जी ट्राई अधिकारी के कॉल से शुरू हुई यह साजिश 17 दिनों तक चली, जिसमें उन्हें वीडियो कॉल पर रखा गया। धोखाधड़ी जनवरी 2026 में सामने आई, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, ग्रेटर कैलाश में रहने वाले 77 वर्षीय महिला और उनके पति, जो डॉक्टर हैं, को 24 दिसंबर 2025 को एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को ट्राई अधिकारी बताया और आरोप लगाया कि उनका मोबाइल नंबर अपमानजनक कॉल्स के लिए इस्तेमाल हो रहा है, साथ ही ब्लैक मनी रखने और मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने का इल्जाम लगाया।
दंपति 2016 से अमेरिका से लौटकर दिल्ली में रह रहे हैं, जबकि उनके बच्चे विदेश में बसे हैं। धोखेबाजों ने उनकी एकांत जीवन का फायदा उठाया और गिरफ्तारी तथा कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर उन्हें लगातार फोन और वीडियो कॉल पर रखा। उन्होंने कई बैंक खातों में कुल 14 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए ताकि आरोप साफ हो सकें।
कॉल्स 9 जनवरी 2026 को रुक गईं, जिसके बाद दंपति ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की। 10 जनवरी को आरबीआई रिफंड के बहाने पुलिस स्टेशन भेजा गया, जहां अधिकारियों ने पुष्टि की कि वे 14.85 करोड़ रुपये के चूना लगाए गए थे। 11 जनवरी को ई-एफआईआर दर्ज की गई और साइबर सेल ने जांच शुरू की।
एक स्रोत के अनुसार राशि 14 करोड़ बताई गई, जबकि दूसरे में लगभग 15 करोड़ (14.85 करोड़) का उल्लेख है। यह मामला डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी का उदाहरण है, जहां पीड़ितों को वर्चुअल हिरासत में रखकर पैसे वसूले जाते हैं। पुलिस ने चेतावनी दी है कि ऐसे स्कैम्स में तुरंत हेल्पलाइन पर संपर्क करें।