दिल्ली के एक 78 वर्षीय कपड़ा व्यापारी ने व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए फर्जी निवेश ऐप में 18.80 करोड़ रुपये गंवा दिए। यह दिल्ली में अब तक का दूसरा सबसे बड़ा साइबर फ्रॉड मामला है, जो जुलाई 2024 में शुरू हुआ और अक्टूबर में सामने आया। पीड़ित ने नवंबर 2024 में पुलिस को शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद जांच में कंबोडिया स्थित चीनी गिरोह का पता चला।
जुलाई 2024 की एक सुबह, दिल्ली के इस वरिष्ठ व्यापारी को एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप पर शेयर ट्रेडिंग कंपनी के ग्रुप में शामिल होने का लिंक मिला। वे ऑनलाइन ट्रेडिंग से अनजान थे, लेकिन 30% रिटर्न का लालच देखकर 24 जुलाई को ग्रुप जॉइन कर लिया। ग्रुप में 50 से अधिक सदस्य और सात एडमिन थे, जो स्टॉक मार्केट के घंटों (सुबह 9 से शाम 4 बजे) में सक्रिय रहते थे।
सदस्यों ने निवेश से मुनाफे की कहानियां साझा कीं, जैसे 75 रुपये में 100 रुपये के शेयर खरीदकर 125 रुपये में बेचना। इससे प्रेरित होकर उन्होंने ऐप डाउनलोड किया और 10 सितंबर को आईपीओ में निवेश के बारे में पूछा। एडमिन ने सलाह दी कि आवेदन के बाद गुरुवार (12 सितंबर) का इंतजार करें। पहला निवेश 25 लाख रुपये का था, और ऐप पर डैशबोर्ड ने 30% लाभ दिखाया, जिससे विश्वास बढ़ा।
कुल 18.80 करोड़ रुपये उन्होंने अपने दो खातों से 26 खातों में ट्रांसफर किए। अक्टूबर 2024 में जब मुनाफा निकालने की कोशिश की, तो ऐप ने ब्लॉक कर दिया और व्हाट्सएप कॉल्स का कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने कहा, 'मेरे पास बस दो रास्ते थे: या तो बीमार हो जाऊं या लड़ूं। मैंने लड़ने का फैसला किया।'
नवंबर 2024 में 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करने के बाद वे 27 नवंबर को आईएफएसओ (इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस) कार्यालय पहुंचे। डीसीपी विनीत कुमार ने बताया कि स्कैमर लालच, डर और जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। जांच में पता चला कि फर्जी वेबसाइट एक एनबीएफसी के नाम पर थी, और सिंडिकेट कंबोडिया से संचालित चीनी गिरोह का था।
मनी म्यूल अकाउंट्स के जरिए पैसे क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेजे गए। पुलिस ने राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और पंजाब से 20 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया, ज्यादातर बेरोजगार या मजदूर। लगभग 1 करोड़ रुपये फ्रीज कर रिकवर किए गए। दिल्ली में इस साल नवंबर तक 1,200 करोड़ के साइबर फ्रॉड रिपोर्ट हुए हैं। पीड़ित ने कहा, 'जब पता चलेगा, सब हंसेंगे मुझ पर।'