सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 21 अप्रैल को जारी नोटिस में सोशल मीडिया पर AI-जनित सामग्री के लिए लगातार दिखाई देने वाले लेबल प्रस्तावित किए हैं। यह आईटी नियमों में संशोधन का हिस्सा है जो उपयोगकर्ता-जनित समाचार पर निगरानी बढ़ाता है। फीडबैक 7 मई तक आमंत्रित किए गए हैं।
मंगलवार को जारी नोटिस में मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) ने आईटी नियम 2021 के नियम 3(3)(a)(ii) में संशोधन प्रस्तावित किया। इसमें कहा गया है कि सिंथेटिकली जनरेटेड इन्फॉर्मेशन (AI जनित सामग्री) के लिए विजुअल डिस्प्ले की पूरी अवधि में लगातार और स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाला लेबल अनिवार्य होगा।
यह नियम फरवरी 2026 में अधिसूचित किया गया था, जो सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज़ पर सिंथेटिकली जनरेटेड कंटेंट (SGI) के लिए दायित्व निर्धारित करता है। MeitY अधिकारी ने कहा कि यह बदलाव सुनिश्चित करेगा कि वीडियो या विजुअल में लेबल शुरुआती कुछ सेकंड के बाद गायब न हो। फरवरी नियमों में सरकारी या अदालती आदेश पर AI या डीपफेक कंटेंट हटाने के लिए तीन घंटे का समयसीमा भी शामिल है।
अक्टूबर 2025 के ड्राफ्ट में 10% विजुअल कवरेज वाला सख्त लेबलिंग प्रस्ताव था, लेकिन उद्योग की आपत्तियों पर फरवरी में इसे हटा दिया गया। उसी नोटिस में 30 मार्च के ड्राफ्ट संशोधनों पर टिप्पणियों की समयसीमा दूसरी बार 7 मई तक बढ़ाई गई, जो उपयोगकर्ता-जनित समाचार को प्रकाशकों के समकक्ष लाता है।
ये संशोधन सरकारी सलाहों का अनुपालन अनिवार्य बनाते हैं, डेटा रिटेंशन 180 दिनों का करते हैं, और इंटर-डिपार्टमेंटल कमिटी की भूमिका बढ़ाते हैं। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने ड्राफ्ट नियमों को पूरी तरह वापस लेने की मांग की है।