भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया गया है, जिसमें भारत से निर्यात पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया गया है। यह कदम भारतीय निर्यातकों को फायदा पहुंचाएगा, खासकर कपड़ा और हीरे जैसे क्षेत्रों में। हालांकि, रूसी तेल खरीद पर अमेरिकी दावों को भारत ने स्पष्ट नहीं किया।
7 फरवरी 2026 को भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया गया, हालांकि फाइनल साइनिंग अभी बाकी है। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगे 50% टैरिफ को 18% तक कम कर दिया है। इससे भारत से अमेरिका जाने वाली वस्तुओं जैसे हीरे, रेशम, कपड़ा, लकड़ी, फर्नीचर और ज्वैलरी पर टैरिफ कम होगा, जिससे 113 अरब डॉलर के बाजार तक पहुंच मिलेगी। तिरुप्पुर के कपड़ा निर्यातक संघ के अध्यक्ष के.एम. सुब्रमण्यम ने कहा, 'यह सौदा तिरुप्पुर के लिए बड़ा विकास लाएगा। अगले 5 वर्षों में निर्यात दोगुना हो सकता है।' वर्तमान में तिरुप्पुर का निर्यात 15,000 करोड़ रुपये का है, और 4,000 करोड़ के लंबित ऑर्डर क्लियर होने की उम्मीद है।
विदेश मंत्रालय ने रूसी तेल खरीद पर अमेरिकी दावों का जवाब देते हुए कहा कि ऊर्जा सुरक्षा 1.4 अरब नागरिकों की प्राथमिकता है। प्रवक्ता रंधीर जायस्वाल ने कहा, 'ऊर्जा स्रोतों को विविधीकृत करना बाजार स्थितियों और वैश्विक गतिशीलता के आधार पर हमारी रणनीति का केंद्र है।' अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कार्यकारी आदेश में दावा किया कि भारत ने रूसी तेल आयात रोकने का वादा किया है, और इसके बदले 25% दंडात्मक टैरिफ हटा लिया गया। लेकिन भारत ने इसे न तो स्वीकारा और न अस्वीकारा। दिसंबर 2025 में रूसी तेल आयात 38 महीनों के न्यूनतम स्तर पर पहुंचा, जबकि अमेरिकी ऊर्जा आयात 31% बढ़ा।
व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता चीन (35%), बांग्लादेश (20%) और वियतनाम (20%) जैसे प्रतिस्पर्धियों पर भारत को बढ़त देगा। हालांकि, भारतीय मूल के अमेरिकियों के प्रभाव को लेकर राय बंटी हुई है; कुछ का कहना है कि यह सौदे में ज्यादा भूमिका नहीं निभा सका। समझौते से छोटे-मध्यम उद्यमों को लाभ होगा और रोजगार सृजन बढ़ेगा।