इंदौर के एक अग्निकांड में आठ परिजनों की मौत के बाद बचे एक उत्तरजीवी ने दमकल की देरी को जिम्मेदार ठहराया है। सौरभ पुगलिया ने पुलिस के डिजिटल ताले के दावे को भी खारिज किया। मेयर ने हालांकि 17 मिनट के प्रतिक्रिया समय का हवाला दिया।
17 मार्च को इंदौर के ब्रजेश्वरी एनेक्स कॉलोनी में 60 वर्षीय व्यवसायी मनोज पुगलिया के घर में आग लग गई, जिसमें आठ परिजन मारे गए। मृतकों में मनोज पुगलिया, उनकी चार माह की गर्भवती बहू सिमरन, भाई विजय सेठिया, उनकी पत्नी सुमन, पुत्र कार्तिक, पुत्री रुचिका जैन और उनके बच्चे राशि व तनय शामिल हैं। सौरभ पुगलिया, मनोज के पुत्र, तीन अन्य परिजनों के साथ बच निकले। पुलिस के अनुसार, घर के बाहर खड़ी इलेक्ट्रिक वाहन के चार्जिंग पॉइंट पर विस्फोट से आग भड़की। सौरभ ने हालांकि पास के बिजली पोल से चिंगारी का हवाला दिया। तीन शव सीढ़ियों पर मिले, जो शायद छत की ओर भाग रहे थे। एक महिला और दो बच्चों के शव रसोई के पास तथा सिमरन बिस्तर पर पाए गए। 32 वर्षीय सौरभ ने गुरुवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात की और दमकल पर सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा, “अगर फायर टेंडर समय पर आ जाता तो जानें बच सकती थीं। यह लगभग एक घंटा देरी से आया और पानी की टंकी भी पूरी नहीं थी।” उन्होंने मुख्य दरवाजे पर डिजिटल ताला होने के दावे को नकारा, कहा कि छत पर सामान्य ताला कुछ परिजनों को फंसाया। इंदौर मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने देरी से इनकार किया। उन्होंने कहा, “रिकॉर्ड के अनुसार फायर टेंडर 17 मिनट में पहुंचा। टीम को कार, तीन बाइक, स्कूटर, एलपीजी सिलेंडर और एसी कंप्रेसर जलते देखने पड़े, दरवाजे जाम थे।” प्रशासन जांच कर रहा है।