माघ गुप्त नवरात्र 2026 की शुरुआत 19 जनवरी से हो गई है, जो 28 जनवरी तक चलेगी। इस दौरान मां दुर्गा की गुप्त उपासना और उनकी दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है। घटस्थापना का मुख्य मुहूर्त सुबह 7:14 से 10:46 बजे तक है।
माघ गुप्त नवरात्र हिंदू धर्म में एक पवित्र अवधि है, जो आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष महत्व रखती है। यह पर्व चार नवरात्रियों में से एक है, जिसमें आषाढ़, माघ, चैत्र और शारदीय नवरात्र शामिल हैं। 2026 में माघ गुप्त नवरात्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आरंभ हुई, जो 19 जनवरी रात 1:21 बजे शुरू होकर 20 जनवरी रात 2:14 बजे समाप्त होगी।
घटस्थापना की प्रक्रिया आज सुबह 7:14 बजे से प्रारंभ हुई, जो 10:46 बजे तक चली। यदि कोई इस समय में पूजा न कर पाए, तो अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:11 से 12:53 बजे उपलब्ध है। पूजन विधि में ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनना, पूजा स्थल को साफ करना और लाल या पीले कपड़े बिछाना शामिल है। मां दुर्गा या उनके गुप्त स्वरूप की मूर्ति या चित्र स्थापित करें, कलश में जल भरकर आम या अशोक पत्ते और नारियल रखें। गणेश का स्मरण कर संकल्प लें, फिर रोली, अक्षत, फूल, सिंदूर, चुनरी और भोग अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं, धूप दिखाएं और दुर्गा सप्तशती, चंडी पाठ या बीज मंत्रों का जाप करें।
गुप्त नवरात्र में मंत्र जप, साधना और ध्यान पर जोर दिया जाता है। पूजा के अंत में आरती करें और सुख-शांति, शक्ति तथा बाधा निवारण की प्रार्थना करें। नौ दिनों तक सात्विक भोजन ग्रहण करें और ब्रह्मचर्य पालन करें। इसकी मान्यता है कि श्रद्धापूर्ण साधना से आध्यात्मिक फल प्राप्त होता है।
इस पर्व का संबंध तंत्र विद्या से है, जहां साधक हठ योग, ध्यान, जप, तंत्र मंत्र, हवन और कठोर व्रत का अभ्यास करते हैं। मां दुर्गा की नौ स्वरूपों की आराधना नौ दिनों-रातों तक की जाती है, जिससे सिद्धि और शक्ति की प्राप्ति होती है। दस महाविद्याओं- मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूम्रवती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी- की पूजा विशेष है।