भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और छह यूक्रेनियाई नागरिकों को म्यांमार स्थित जातीय सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण देने के आरोप में गिरफ्तार किया। ये गिरफ्तारियां कोलकाता, लखनऊ और दिल्ली हवाई अड्डों पर हुईं। आरोपी टूरिस्ट वीजा पर आए थे लेकिन मिजोरम में बिना परमिट घुसकर म्यांमार पहुंचे।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पिछले सप्ताह कोलकाता हवाई अड्डे पर मैथ्यू आरोन वैनडाइक (45) को, लखनऊ पर तीन यूक्रेनियाई नागरिकों को और दिल्ली पर तीन अन्य को हिरासत में लिया। सभी को शनिवार को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां तीन दिन की रिमांड मिली जो सोमवार को 27 मार्च तक बढ़ा दी गई। यूक्रेनियाई नागरिकों के नाम हैं: हुरबा पेट्रो, स्लिवियाक तारस, इवान सुकमानोवस्की, स्टेफांकिव मैरियन, हॉनचारुक माक्सिम और कामिंस्की विक्टर। एनआईए के अनुसार, ये टूरिस्ट वीजा पर भारत आए लेकिन मिजोरम के संरक्षित क्षेत्र में बिना प्रोटेक्टेड एरिया परमिट (पीएपी) के घुसे और म्यांमार पहुंचे। वहां उन्होंने एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स (ईएजी) को हथियार प्रशिक्षण दिया, जो भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में सक्रिय विद्रोही संगठनों का समर्थन करते हैं। साथ ही, यूरोप से ड्रोन की खेप मंगवाई जो सशस्त्र समूहों तक पहुंचाई। सभी पर अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट की धारा 18 सहित अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज। यूक्रेन सरकार ने विदेश मंत्रालय से रिहाई और कांसुलर एक्सेस की मांग की। वैनडाइक 'सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल' (एसओएलआई) के संस्थापक हैं, जो तानाशाही विरोधी समूहों को प्रशिक्षण देते हैं। उन्होंने लीबिया और यूक्रेन में लड़ाई लड़ी। कुछ विशेषज्ञ इसे बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना की 2024 की 'ईसाई राज्य' चेतावनी से जोड़ रहे हैं, लेकिन एनआईए या सरकार ने कोई टिप्पणी नहीं की। मिजोरम सीएम लालदुहोमा ने 2025 में यूक्रेन युद्ध अनुभवी सैनिकों के मिजोरम経由 म्यांमार प्रवेश की बात कही थी।