12 मार्च 2026 को संसद भवन परिसर में विपक्षी सांसदों ने वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की कमी के खिलाफ प्रदर्शन किया। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला, कहा कि पीएम खुद एपस्टीन फाइल्स और अडानी मामले से घबरा गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए और नकली चूल्हे के साथ विरोध जताया।
12 मार्च 2026 को लोकसभा से निलंबित आठ सांसदों सहित कई विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की कमी के मुद्दे पर प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित डीएमके, टीएमसी और एसपी के सांसद मकर द्वार के पास इकट्ठे हुए। उन्होंने 'नाम नरेंद्र, काम सरेंडर' और 'मोदी जी, एलपीजी' जैसे नारे लगाए।
महिला विपक्षी सांसदों ने नकली ईंट के चूल्हे के साथ बैठकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए। राहुल गांधी ने प्रदर्शन के बाद पत्रकारों से कहा, "पीएम कह रहे हैं कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन पीएम खुद पूरी तरह से अलग कारणों से घबरा गए हैं... वे एपस्टीन के कारण घबरा गए हैं, वे अडानी मामले के कारण घबरा गए हैं, वे सदन के अंदर नहीं आ पा रहे हैं।" उन्होंने जोड़ा कि प्रधानमंत्री की कुर्सी खाली थी।
यह प्रदर्शन पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष के कारण वैश्विक ईंधन आपूर्ति में बाधा के चलते हुआ है। वाणिज्यिक एलपीजी की कमी से होटल, रेस्तरां और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं पर असर पड़ा है, जो घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देने के कारण प्रभावित हो रहे हैं। 11 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से घबराने न को कहा और आश्वासन दिया कि सार्वजनिक हित की रक्षा की जाएगी। तेल कंपनियां घरेलू एलपीजी की आपूर्ति सुरक्षित बताती हैं।
राहुल गांधी ने निलंबित सांसदों के साथ चाय पी। विपक्ष पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की मांग कर रहा है। दिल्ली में कई रेस्तरां एक-दो दिनों के स्टॉक के साथ संघर्ष कर रहे हैं।