कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने भारत-बांग्लादेश संबंधों पर नौवीं रिपोर्ट पेश की है, जिसमें ढाका की राजनीतिक अस्थिरता, अल्पसंख्यकों पर हमले और चीन की बढ़ती मौजूदगी को प्रमुख खतरे बताया गया है। रिपोर्ट में सरकार को सतर्क कूटनीति अपनाने की सलाह दी गई है।
नई दिल्ली, 20 दिसंबर 2025: संसद की विदेश मामलों की स्थायी समिति ने 'भारत-बांग्लादेश संबंधों का भविष्य' पर अपनी नौवीं रिपोर्ट 16 दिसंबर 2025 को अपनाई। समिति ने विदेश मंत्रालय से कई दौर की ब्रीफिंग ली, जिसमें 11 दिसंबर 2024 को विदेश सचिव के साथ चर्चा शामिल थी।
रिपोर्ट में अगस्त 2024 के बाद बांग्लादेश में घटनाक्रमों को भारत के लिए अभूतपूर्व रणनीतिक, सुरक्षा और कूटनीतिक चुनौतियां बताया गया है। 1971 के मुक्ति संग्राम को संबंधों की नैतिक आधारशिला कहा गया, लेकिन संशोधनवादी विचारों और युवाओं में जागरूकता की कमी पर चिंता जताई। समिति ने जन कूटनीति, शैक्षणिक आदान-प्रदान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से 1971 की भावना को जीवित रखने की सिफारिश की।
शेख हसीना के भारत में ठहरने को मानवीय मूल्यों पर आधारित बताया, लेकिन राजनीतिक गतिविधियों पर रोक का उल्लेख किया। दोनों देशों के बीच 40 से अधिक द्विपक्षीय तंत्रों का सक्रिय उपयोग जरूरी ठहराया। अल्पसंख्यकों पर मई 2025 तक 2,446 हमलों को चिंताजनक माना और बांग्लादेशी अधिकारियों की 'राजनीतिक हत्याएं' वाली व्याख्या पर नाराजगी जताई।
4,096 किलोमीटर सीमा में 864 किलोमीटर बिना बाड़ के हैं; आधुनिक निगरानी की सिफारिश की। 2024-25 में व्यापार 13.46 अरब डॉलर पहुंचा, लेकिन बाधाओं पर चिंता। चीन के मोंगला पोर्ट और लालमोनिरहाट एयरबेस पर सतर्कता बरतने को कहा। भारत ने 10 अरब डॉलर विकास सहायता की प्रतिबद्धता जताई। गंगा जल संधि 2026 में समाप्त होने पर नई बातचीत की सलाह दी।