सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा है कि क्या उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों को भारत में प्रवेश की अनुमति देने वाला नया आदेश असम समझौते के 1971 की समय सीमा का उल्लंघन करता है। यह याचिका असम समझौते के उल्लंघन का हवाला देती है।
सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है, जिसमें दावा किया गया है कि उत्पीड़ित धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारत में प्रवेश की अनुमति देने वाला हालिया आदेश असम समझौते का उल्लंघन करता है। असम समझौते में 1971 को अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए समय सीमा निर्धारित की गई है।
यह मामला नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) से जुड़ा प्रतीत होता है, जो अवैध प्रवासियों और धार्मिक अल्पसंख्यकों के मुद्दों को छूता है। याचिका में असम समझौते के प्रावधानों का हवाला दिया गया है, जो पूर्वोत्तर राज्य में विदेशी नागरिकों के प्रवेश को नियंत्रित करता है। केंद्र को निर्देश दिया गया है कि वह इस पर अपना पक्ष स्पष्ट करे।
यह घटना 5 दिसंबर 2025 को सामने आई, जब कोर्ट ने इसकी सुनवाई की। कीवर्ड्स जैसे सुप्रीम कोर्ट, असम समझौता, सीएए, अवैध प्रवासी और धार्मिक अल्पसंख्यक इस मुद्दे की जटिलता को रेखांकित करते हैं। कोई विरोधाभासी जानकारी उपलब्ध नहीं है।