सुप्रीम कोर्ट द्वारा फरवरी 2024 में चुनावी बॉन्ड योजना रद्द करने के बाद, भाजपा को 2024-25 वित्तीय वर्ष में दान 53 प्रतिशत बढ़कर 6,073 करोड़ रुपये हो गया। पिछले वर्ष के 3,967 करोड़ रुपये की तुलना में यह वृद्धि उल्लेखनीय है, जिसमें अधिकांश राशि चुनावी ट्रस्टों से आई। ट्रस्टों ने कुल 3,811 करोड़ रुपये दान किए, जिनमें से 82 प्रतिशत भाजपा को मिले।
सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2024 में चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित कर रद्द कर दिया था, जो गुमनाम राजनीतिक दान की अनुमति देती थी। इसके बावजूद, 2024-25 में भाजपा को प्राप्त दान में कोई कमी नहीं आई, बल्कि यह पिछले वर्ष से 53 प्रतिशत अधिक रहा। पार्टी की योगदान रिपोर्ट के अनुसार, कुल 6,073 करोड़ रुपये में से 3,112 करोड़ रुपये चुनावी ट्रस्टों से आए, जो कुल ट्रस्ट दान का 82 प्रतिशत है। शेष 2,961 करोड़ रुपये व्यक्तियों और कंपनियों से प्राप्त हुए।
ट्रस्टों के कुल दान 3,811 करोड़ रुपये थे, जो 2023-24 के 1,218 करोड़ रुपये से 200 प्रतिशत अधिक है। प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट ने सबसे अधिक 2,180 करोड़ रुपये भाजपा को दिए, जिनमें जिंदल स्टील, मेघा इंजीनियरिंग, भारती एयरटेल और ऑरोबिंदो फार्मा जैसी कंपनियां शामिल हैं। प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट ने 914.97 करोड़ रुपये दान किए, जिनमें से 80.82 प्रतिशत भाजपा को मिले, मुख्य रूप से टाटा समूह की कंपनियों से। अन्य ट्रस्टों जैसे न्यू डेमोक्रेटिक (महिंद्रा से 150 करोड़ रुपये) और ट्रायम्फ (सीजी पावर से 21 करोड़ रुपये) ने भी भाजपा को प्रमुख हिस्सा दिया।
ट्रस्टों के अलावा, सीरम इंस्टीट्यूट (100 करोड़ रुपये), रुंगटा सन्स (95 करोड़ रुपये) और वेदांता (67 करोड़ रुपये) शीर्ष दानदाता रहे। आईटीसी, हीरो एंटरप्राइजेज और मैनकाइंड फार्मा जैसी कंपनियां भी महत्वपूर्ण योगदानकर्ता थीं। कांग्रेस को ट्रस्टों से 299 करोड़ रुपये (8 प्रतिशत) और अन्य पार्टियों को 400 करोड़ रुपये मिले।
यह दान पिछले पांच वर्षों में भाजपा को प्राप्त सर्वाधिक राशि है। अब कंपनियां चेक, डिमांड ड्राफ्ट या बैंक ट्रांसफर से दान कर सकती हैं, जो पारदर्शी है। पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2017-18 में योजना का बचाव करते हुए कहा था, 'नकद दान गुमनाम होते हैं, जबकि चेक से दानकर्ता की पहचान खुलती है।'