केंद्र सरकार ने एनआईटी कुरुक्षेत्र के निदेशक बी वी रमना रेड्डी के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार तत्काल प्रभाव से वापस ले लिए हैं। शिक्षा मंत्रालय ने 29 मार्च को आदेश जारी कर एक तीन सदस्यीय समिति गठित की है, जो निदेशक की नेतृत्व भूमिका और संस्थान के कार्यों की समीक्षा करेगी। समिति भर्ती प्रक्रियाओं और केंद्रीय सतर्कता आयोग की शिकायतों की जांच करेगी।
शिक्षा मंत्रालय ने 29 मार्च को जारी आदेश में कहा कि प्रोफेसर रेड्डी राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान अधिनियम, 2007, प्रथम क़ानूनों तथा बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा सौंपी गई शक्तियों का प्रयोग नहीं करेंगे। यह कार्रवाई तत्काल प्रभाव से लागू है और आगे आदेश तक जारी रहेगी।
तीन सदस्यीय समिति का नेतृत्व राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी फोरम के अध्यक्ष अनिल सहस्रबुद्धे कर रहे हैं। अन्य सदस्यों में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एम मदन गोपाल और मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MANIT), भोपाल के निदेशक प्रोफेसर केके शुक्ला शामिल हैं। समिति एनआईटी कुरुक्षेत्र का दौरा करेगी और एक माह में रिपोर्ट सौंपेगी।
समिति संस्थान के कार्य, प्रगति और मामलों की समीक्षा करेगी, जिसमें भर्ती एवं प्रोन्नति प्रक्रियाएं, स्टाफ शिकायतों का निपटारा तथा केंद्रीय सतर्कता आयोग और अन्य एजेंसियों द्वारा भेजी गई शिकायतें शामिल हैं। यह निदेशक के नेतृत्व और कार्यप्रणाली तथा संस्थान के समग्र शासन, शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्यों की भी जांच करेगी।
प्रोफेसर रमना रेड्डी ने 2022 में एनआईटी कुरुक्षेत्र के निदेशक के पदभार संभाला था।