पिछले छह महीनों में स्लीपर बस दुर्घटनाओं में 145 लोगों की मौत के बाद केंद्र सरकार ने स्लीपर कोच बसों के लिए कड़े सुरक्षा नियम लागू किए हैं। केवल मान्यता प्राप्त निर्माताओं को ही इन बसों का निर्माण करने की अनुमति होगी, और मौजूदा बसों में उन्नत सुरक्षा सुविधाएं लगानी होंगी। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इन नियमों की घोषणा की है।
नई दिल्ली, 9 जनवरी 2026: पिछले छह महीनों में देशभर में स्लीपर कोच बसों की दुर्घटनाओं, खासकर आग लगने की घटनाओं में लगभग 145 लोगों की जान चली गई। इन हादसों के बाद केंद्र सरकार ने यात्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की कि अब स्लीपर बसों का निर्माण केवल वे ऑटोमोबाइल कंपनियां या निर्माता ही कर सकेंगे, जिन्हें केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त हो। स्थानीय या मैनुअल बॉडी बिल्डर्स को इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी।
गडकरी ने कहा, "अब स्लीपर बसों का निर्माण केवल वही ऑटोमोबाइल कंपनियां या निर्माता कर सकेंगे, जिन्हें केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त हो।" सरकार का मानना है कि इससे निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा स्तर में सुधार होगा, क्योंकि ट्रैवल एजेंसियां अक्सर स्थानीय बिल्डर्स से सेफ्टी मानकों की अनदेखी कर बसें बनवाती हैं।
मौजूदा स्लीपर बसों के लिए भी निर्देश जारी किए गए हैं। सभी बसों में फायर डिटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी लाइटिंग, ड्राइवर ड्रोउजिनेस अलर्ट सिस्टम (ADAS), इमरजेंसी एग्जिट और सेफ्टी हैमर जैसे फीचर्स अनिवार्य रूप से लगाने होंगे। ये सुविधाएं आपात स्थिति में यात्रियों की मदद करेंगी।
इसके अलावा, सभी स्लीपर बसों को AIS-052 बस बॉडी कोड और संशोधित बस बॉडी कोड का पालन करना होगा, जो 1 सितंबर 2025 से लागू है। इस कोड के बिना कोई बस सड़क पर नहीं चलेगी। AIS-052 ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड है, जो बस के डिजाइन, संरचना और सुरक्षा मानकों को नियंत्रित करता है।
ये नियम लंबी दूरी की यात्राओं में स्लीपर बस सेवाओं की सुरक्षा को बेहतर बनाने का प्रयास हैं, जिससे भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।