नई दिल्ली में 24 अप्रैल 2026 को ब्रिक्स के उप विदेश मंत्रियों और मध्य पूर्व व उत्तर अफ्रीका (मेना) पर विशेष दूतों की बैठक में अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध पर सहमति नहीं बन सकी। भारत ने अध्यक्ष के रूप में सारांश जारी कर सदस्यों द्वारा मध्य पूर्व संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त करने का उल्लेख किया। चर्चा में गाजा, लेबनान युद्धविराम और अन्य क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार交換 हुआ।
ब्रिक्स समूह के उप विदेश मंत्रियों और मध्य पूर्व व उत्तर अफ्रीका (मेना) पर विशेष दूतों ने 24 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में बैठक की। विदेश मंत्रालय ने कहा कि सदस्यों ने मध्य पूर्व के हालिया संघर्ष पर "गहरी चिंता" व्यक्त की और विभिन्न मत व्यक्त किए।
चर्चा में फिलिस्तीन मुद्दा, गाजा में मानवीय सहायता, अनरवा की भूमिका, आतंकवाद पर शून्य सहनशीलता, लेबनान में युद्धविराम का स्वागत, यूनिफिल पर हमलों की अस्वीकार्यता, सीरिया में पुनर्निर्माण, यमन में राजनीतिक समाधान, इराक में स्थिरता, लीबिया में राजनीतिक प्रक्रिया और सूडान में मानवीय संकट शामिल थे। उन्होंने चीन की अध्यक्षता में 2027 में फिर मिलने पर सहमति जताई।
भारत 2026 में ब्रिक्स का अध्यक्ष है और इस साल नेताओं की बैठक की मेजबानी करेगा। मार्च में ईरान ने ब्रिक्स के नाम से अमेरिका-इजरायल हमलों की निंदा करने का बयान जारी करने के लिए भारत से अनुरोध किया था, लेकिन सदस्य देशों की संलिप्तता के कारण सहमति कठिन रही। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायस्वाल ने कहा, "कुछ सदस्य वर्तमान स्थिति में प्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं, जिससे ब्रिक्स की सामान्य स्थिति पर सहमति बनाना प्रभावित हुआ है।"
ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका के अलावा मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई और इंडोनेशिया शामिल हैं। सऊदी अरब और यूएई में अमेरिकी अड्डे हैं, जो ईरानी हमलों का निशाना बने। विदेश मंत्रियों की बैठक 14-15 मई को भारत में प्रस्तावित है।