रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को किर्गिज़स्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे, जहां वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे। पश्चिम एशिया में युद्ध के प्रभाव को कम करने के उपायों पर चर्चा होने की संभावना है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि बैठक वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच हो रही है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को बिश्केक के लिए प्रस्थान किया, जहां मंगलवार को SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक होनी है। रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, सदस्य देशों के रक्षा मंत्री क्षेत्र की रक्षा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विचार-विश्वास करेंगे। अंतरराष्ट्रीय शांति, आतंकवाद-रोधी प्रयास और SCO सदस्य राज्यों के बीच रक्षा सहयोग पर भी चर्चा होगी।
यह बैठक पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट की पृष्ठभूमि में हो रही है। मंत्रालय ने कहा कि SCO, जो क्षेत्र की सबसे बड़ी राजनीतिक और आर्थिक संगठनों में से एक है, संघर्ष के प्रभाव को कम करने के उपायों पर चर्चा कर सकता है। ईरान SCO का सदस्य है। सिंह ने जर्मनी में कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाएं भारत की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करती हैं।
सिंह वैश्विक शांति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता और आतंकवाद व अतिवाद के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति पर जोर देंगे। उन्होंने एक्स पर लिखा, "SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेने को उत्सुक हूं। वैश्विक शांति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालूंगा।" वे अन्य सदस्य देशों के समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे।
यह बैठक पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले (जिसमें 26 लोग मारे गए) के एक साल बाद हो रही है, जिसके बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। पिछले साल किंगदाओ SCO बैठक में सिंह ने पहलगाम हमले का उल्लेख न होने पर मसौदा बयान पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया था।