रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को पश्चिम एशिया में विकसित स्थिति की निगरानी के लिए गठित अनौपचारिक सशक्त मंत्रियों के समूह (आईजीओएम) की पहली बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने मध्यम से दीर्घकालिक तैयारियों, त्वरित निर्णय लेने और अफवाहों तथा फर्जी खबरों का मुकाबला करने पर जोर दिया। बैठक में विभिन्न क्षेत्रों पर संघर्ष के प्रभाव का समग्र मूल्यांकन किया गया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को पश्चिम एशिया संघर्ष की स्थिति पर नजर रखने के लिए गठित अनौपचारिक सशक्त मंत्रियों के समूह (आईजीओएम) की पहली बैठक की अध्यक्षता की। रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, सिंह ने मध्यम से दीर्घकालिक तैयारियों की रणनीति अपनाने, उच्च स्तरीय समन्वय बनाए रखने और त्वरित निर्णय लेने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने "सक्रिय, समन्वित और दूरदर्शी दृष्टिकोण" अपनाने तथा विकसित परिदृश्य के मद्देनजर सतर्क रहने की बात कही।
बैठक में सात सशक्त सचिव समूहों (ईजीओएस) ने विभिन्न क्षेत्रीय मुद्दों और मौजूदा नीति उपायों पर प्रस्तुतियां दीं। आईजीओएम ने स्थिति और भारत के विभिन्न क्षेत्रों पर उसके प्रभाव का समग्र आकलन किया। सभी नीतिगत प्रयासों को समन्वय में रखने और समयबद्ध तरीके से लागू करने का निर्देश दिया गया।
सिंह ने मंत्रालयों और विभागों को अफवाहों, गलत सूचनाओं तथा फर्जी खबरों का मुकाबला करने के लिए सूचनाएं साझा करने को कहा। उन्होंने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के व्हाट्सएप चैनल के माध्यम से सटीक जानकारी प्रसारित करने पर जोर दिया। राज्यों और जिला प्रशासनों के साथ निकट समन्वय तथा जनता को प्रमुख नीतियों की समय पर जानकारी देने की आवश्यकता पर बल दिया गया। विभिन्न उद्योगों पर प्रभाव का आकलन भी चर्चा का विषय रहा।
बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, विद्युत मंत्री मनोहर लाल, रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा, उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी, नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह आदि उपस्थित थे।
बैठक के बाद एक्स पर एक पोस्ट में सिंह ने कहा, "प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार संघर्ष के किसी भी प्रभाव से भारतीयों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।" उन्होंने ऊर्जा आपूर्ति, आवश्यक वस्तुओं की घरेलू उपलब्धता, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की लचीलापन तथा आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती पर जोखिमों की समीक्षा का उल्लेख किया।