मुंबई के कई अदालतों में ईमेल के माध्यम से बम धमकियां प्राप्त होने के बाद गुरुवार को बॉम्बे हाई कोर्ट और नागपुर बेंच सहित कार्यवाही अस्थायी रूप से निलंबित कर दी गई। अदालत अधिकारियों ने निकासी प्रोटोकॉल का पालन किया और पुलिस तथा बम निष्क्रियकरण दलों ने परिसर को सुरक्षित घोषित करने तक सभी जजों को एकत्रित रखा। किसी भी प्रभावित पक्ष के खिलाफ प्रतिकूल आदेश जारी नहीं किए गए।
गुरुवार को मुंबई में अदालती सत्र शुरू होते ही किल्ला/एक्सप्लेनेड, बांद्रा, मझगांव और अंधेरी मजिस्ट्रेट कोर्टों में ईमेल के जरिए बम धमकियां रिपोर्ट की गईं। यह बॉम्बे हाई कोर्ट में तीन महीनों में दूसरी बार ऐसी घटना हुई है। मुंबई पुलिस के बम दस्ते ने तत्काल हस्तक्षेप किया और सभी प्रभावित स्थानों पर जांच की।
अदालत अधिकारियों ने मानक निकासी प्रक्रिया अपनाई, जिसमें सभी जजों को एक सुरक्षित क्षेत्र में इकट्ठा किया गया। बम निष्क्रियकरण दलों ने परिसरों की गहन जांच के बाद उन्हें सुरक्षित घोषित कर दिया, जिसके बाद कार्यवाही फिर से शुरू हो सकी। इस व्यवधान के कारण उपस्थित न हो पाने वालों के लिए कोई नकारात्मक आदेश जारी नहीं किए गए, जिससे न्यायिक प्रक्रिया की निरंतरता बनी रही।
यह घटना मुंबई की अदालती सुरक्षा पर सवाल उठाती है, खासकर पिछले तीन महीनों में दोहराई गई धमकियों के संदर्भ में। पुलिस ने धमकियों को संभवतः धोखा माना है, लेकिन जांच जारी है। नागपुर बेंच भी प्रभावित हुई, जो बॉम्बे हाई कोर्ट का हिस्सा है। कुल मिलाकर, कोई वास्तविक खतरा साबित नहीं हुआ, लेकिन यह न्यायिक संस्थानों की सुरक्षा उपायों की आवश्यकता को रेखांकित करता है।