क्रैशफ्री इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, कानूनी अधिकारों की कमी के कारण भारत में हजारों सड़क हादसे पीड़ित मुआवजे के बिना रह जाते हैं, जबकि मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल्स (MACTs) में 96,000 करोड़ रुपये से अधिक के दावे लंबित हैं। रिपोर्ट ने 2021 विश्व बैंक अध्ययन का हवाला दिया है जिसमें पाया गया कि निम्न आय वर्ग के 70% और उच्च आय वर्ग के 63% परिवार मुआवजे की योजनाओं से अनभिज्ञ हैं।
क्रैशफ्री इंडिया ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें भारत में सड़क हादसों के पीड़ितों को मुआवजा न मिलने की समस्याओं पर प्रकाश डाला गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कानूनी सहायता की कमी, जागरूकता का अभाव और प्रणालीगत खामियां पीड़ितों को उनके नुकसान के लिए उचित मुआवजा पाने से वंचित कर रही हैं। मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल्स (MACTs) में 96,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के दावे लंबित पड़े हैं।
रिपोर्ट ने 2021 विश्व बैंक अध्ययन ‘Traffic Crash Injuries and Disabilities’ का संदर्भ दिया, जिसमें निम्न आय वाले घरों के 70 प्रतिशत और उच्च आय वाले घरों के 63 प्रतिशत परिवारों को सड़क हादसों के बाद मुआवजे की प्रावधानों की जानकारी नहीं थी।
यह रिपोर्ट दिल्ली से जुड़े समाचारों के संदर्भ में उभर रही है, जहां सड़क सुरक्षा एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।