ओडिशा के बलांगीर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण मंच ने 18 अप्रैल को भारतीय रेलवे को एक यात्री को 1.3 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया, जिसकी कनेक्टिंग फ्लाइट 2024 में सात घंटे लेट ट्रेन के कारण मिस हो गई। यह राशि नुकसान की भरपाई, मानसिक पीड़ा और भुगतान में देरी के जुर्माने के लिए है। यात्री को 19 अप्रैल को यह राशि मिल गई।
चंदी प्रसाद खमारी ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज की थी। उन्होंने 23 अगस्त 2024 को झारसुगुड़ा से हावड़ा जाने वाली ट्रेन नंबर 12129 की टिकट बुक की थी। ट्रेन को झारसुगुड़ा से शाम 7:50 बजे रवाना होना था और हावड़ा सुबह 3:55 बजे पहुंचना था, जिससे गुवाहाटी जाने वाली सुबह 8:05 बजे की फ्लाइट के लिए करीब चार घंटे का बफर था।
लेकिन ट्रेन दो घंटे लेट रवाना हुई और हावड़ा सात घंटे लेट पहुंची, जिससे खमारी फ्लाइट मिस कर बैठे। उन्होंने रेलवे अधिकारियों से शिकायत की लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। रेलवे ने दावा किया कि ट्रेन की समयबद्धता की गारंटी नहीं है और आईआरसीए कोचिंग टैरिफ के तहत देरी संभव है।
मंच ने रेलवे के दावों को खारिज कर दिया। इसने सुप्रीम कोर्ट के नॉर्दर्न वेस्टर्न रेलवे बनाम संजय शुक्ला फैसले का हवाला देते हुए कहा कि देरी नियंत्रण से बाहर साबित होनी चाहिए। मंच ने प्रारंभिक रूप से 20,000 रुपये फ्लाइट नुकसान, 30,000 रुपये मानसिक पीड़ा और 5,000 रुपये मुकदमे के खर्च के लिए आदेश दिया।
30 दिनों में भुगतान न होने पर प्रतिदिन 500 रुपये का जुर्माना लगाया गया। 200 दिनों से अधिक देरी के कारण कुल राशि 1.3 लाख रुपये हो गई। मंच ने कहा कि रेलवे जैसी सार्वजनिक सेवा को देरी रोकने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए।