दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण और कोहरे ने हालात बिगाड़ दिए हैं। अधिकांश इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 350 से ऊपर पहुंच गया है और वेंटिलेशन इंडेक्स 800 तक गिर चुका है, जो स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा है। डॉक्टरों ने चेतावनी जारी की है कि इससे सांस की बीमारियां बढ़ सकती हैं।
दिल्ली में सर्दी की शुरुआत होते ही प्रदूषण और कोहरे ने संकट पैदा कर दिया है। आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 350 से ऊपर है, जो 'गंभीर' श्रेणी में आता है। वेंटिलेशन इंडेक्स 800 तक गिर गया है, जो हवा के संचरण को बहुत कम कर देता है और प्रदूषण को और घना बनाता है।
यह स्थिति स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। द हिंदू के अनुसार, दिल्ली में मौसमी पीएम2.5 स्तर 107-130 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया है, जो राष्ट्रीय मानक 60 माइक्रोग्राम और डब्ल्यूएचओ दिशानिर्देश 15 माइक्रोग्राम से कहीं अधिक है। वायु प्रदूषण से भारत में 2023 में लगभग 20 लाख मौतें हुईं, मुख्य रूप से हृदय रोग, स्ट्रोक, सीओपीडी और डायबिटीज से। दिल्ली में पीएम2.5 एक्सपोजर से जीवन प्रत्याशा में आठ साल से अधिक की कमी आ रही है।
श्वसन संबंधी बीमारियां सबसे अधिक प्रभावित हो रही हैं। एआईआईएमएस के डेटा से पता चलता है कि पीएम2.5 में 10 माइक्रोग्राम की वृद्धि से बच्चों में श्वसन संकट के आपातकालीन मामलों में 20-40% इजाफा होता है। बच्चे फेफड़ों की क्षमता में 10-15% कमी झेल रहे हैं। हृदय संबंधी जोखिम भी बढ़े हैं, जहां हर 10 माइक्रोग्राम पीएम2.5 वृद्धि से वार्षिक मृत्यु दर 8% बढ़ जाती है।
आर्थिक प्रभाव भी गंभीर हैं। प्रदूषण से व्यापार प्रभावित हो रहा है, खासकर परिवहन और निर्माण क्षेत्र में। सुप्रीम कोर्ट और जीआरएपी नियम लागू हैं, लेकिन प्रवर्तन कमजोर है। विशेषज्ञों का कहना है कि वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक प्रक्रियाएं और कचरा जलाना मुख्य कारण हैं। डॉ. सुधीर कुमार शुक्ला के अनुसार, स्वच्छ हवा को मौलिक अधिकार मानना जरूरी है।
सरकार को परिवहन विद्युतीकरण, औद्योगिक नियंत्रण और अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार करने की सलाह दी जा रही है। यह संकट पूरे उत्तर भारत को प्रभावित कर रहा है, जहां गरीब समुदाय सबसे अधिक प्रभावित हैं।