राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 18 दिसंबर 2025 को बीएस-वीआई मानक से नीचे के गैर-दिल्ली निजी वाहनों पर प्रवेश प्रतिबंध और 'नो पीयूसी, नो फ्यूल' नियम लागू हो गया है। घने कोहरे और वायु प्रदूषण के बीच ये कदम एयर क्वालिटी इंडेक्स 356-358 तक पहुंचने पर उठाए गए हैं। उड़ानें और ट्रेनें प्रभावित हुई हैं, लेकिन हवाओं से सुधार की उम्मीद है।
दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) IV के तहत सख्त कदम उठाए गए हैं। 18 दिसंबर 2025 को गैर-दिल्ली निजी वाहनों जो बीएस-वीआई से नीचे हैं, पर प्रवेश प्रतिबंध लागू हुआ। ईंधन पंपों पर वैध पीयूसी प्रमाणपत्र के बिना ईंधन नहीं दिया जा रहा, जिसमें ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर कैमरे, वॉयस अलर्ट और पुलिस सहायता का उपयोग हो रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, 126 चेकपॉइंट्स पर 580 पुलिसकर्मी तैनात हैं, जिनमें सीमाएं शामिल हैं। ट्रांसपोर्ट विभाग की टीमें पेट्रोल पंपों और बॉर्डर पॉइंट्स पर कार्यरत हैं। हालांकि, सीएनजी या इलेक्ट्रिक वाहन, सार्वजनिक परिवहन, आवश्यक वस्तुओं या सेवाओं वाले वाहन इससे मुक्त हैं। निर्माण सामग्री ले जाने वाले वाहनों को भी शहर में प्रवेश की अनुमति नहीं है।
घने कोहरे ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। दिल्ली में दृश्यता 100 मीटर तक सीमित हो गई, जिससे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ानें प्रभावित हुईं। एयर इंडिया और स्पाइसजेट ने यात्री सलाह जारी की, जिसमें कम दृश्यता से देरी या रद्दीकरण की चेतावनी दी गई। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अनुसार, AQI 356 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में है। चार स्टेशनों पर यह गंभीर स्तर के करीब था।
मौसम विभाग ने अनुमान लगाया कि दिन में उत्तर-पश्चिमी हवाओं की गति 10-15 किमी/घंटा रहेगी, जो कोहरे को कम करने में मदद करेगी। दिल्ली सरकार ने अतिरिक्त उपाय जैसे वर्क फ्रॉम होम भी लागू किए हैं। ये कदम प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवश्यक हैं, लेकिन उड़ानों और सड़क यातायात पर असर डाल रहे हैं।