वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में भारत का वस्तु व्यापार घाटा पिछले साल के 21.69 अरब डॉलर से घटकर 20.67 अरब डॉलर रह गया। पश्चिम एशिया संकट के कारण पेट्रोलियम आयात में कमी और क्षेत्र को निर्यात में गिरावट आई। वित्त वर्ष 2026 में वस्तु निर्यात 1% बढ़कर 441 अरब डॉलर हुए।
मार्च में भारत के निर्यात 7.4% घटकर 38.92 अरब डॉलर रह गए, जबकि आयात 6.9% कम होकर 59.59 अरब डॉलर पर सिमट गए। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा, "पश्चिम एशिया संकट के कारण क्षेत्र को निर्यात 57.95% और आयात 51.64% गिरे। हमारा मासिक निर्यात करीब 6 अरब डॉलर से घटकर 3.5 अरब डॉलर हो गया।"
उन्होंने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में कुल निर्यात 860 अरब डॉलर से अधिक हो गया, जो 4.22% की वृद्धि दर्शाता है, जबकि आयात सोने की कीमतों से प्रेरित होकर 6.7% बढ़कर 974 अरब डॉलर पहुंचे। यूएई, सऊदी अरब, इराक और कतर से आयात क्रमशः 66.32%, 37.32%, 64.30% और 47.89% घटीं। अमेरिका को निर्यात भी 20% कम हुआ।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) के अध्यक्ष एस.सी. राल्हन ने विविधीकृत निर्यात टोकरी का श्रेय दिया, जिसमें इंजीनियरिंग गुड्स, पेट्रोलियम उत्पाद प्रमुख थे। इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट्स प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन पंकज चढ्ढा ने कहा कि 28 फरवरी से शुरू हुए पश्चिम एशिया संघर्ष ने आपूर्ति श्रृंखला बाधित की, जिससे ऊर्जा मूल्य बढ़े और WPI मुद्रास्फीति 3.88% पर पहुंची। फिर भी, मार्च में इंजीनियरिंग निर्यात 1.1% बढ़कर 10.94 अरब डॉलर हुए।