एक हालिया अध्ययन से पता चलता है कि घर के पास स्ट्रीट फूड और फास्ट-फूड आउटलेट्स का अधिक होना मोटापे और डायबिटीज के जोखिम को बढ़ाता है, खासकर जहां स्वस्थ फल-सब्जी की दुकानें कम हों और व्यायाम की जगहें दूर हों।
भारत में जीवनशैली संबंधी बीमारियों के बढ़ते मामलों के बीच, एक नया शोध बताता है कि पड़ोसी इलाकों में स्ट्रीट फूड और फास्ट-फूड की उपलब्धता स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। अध्ययन के अनुसार, जहां घर के नजदीक ये अस्वास्थ्यकर विकल्प प्रचुर मात्रा में हों, वहीं मोटापे और डायबिटीज जैसी 'डायबेसिटी' की संभावना अधिक होती है।
यह जोखिम तब और बढ़ जाता है जब क्षेत्र में स्वस्थ भोजन जैसे फल और सब्जियों की दुकानें दुर्लभ हों और पार्क या जिम जैसी व्यायाम सुविधाएं दूर हों। शोधकर्ताओं ने जोर दिया कि भोजन पर्यावरण (फूड एनवायरनमेंट) सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर भारत जैसे देश में जहां स्ट्रीट फूड संस्कृति गहरी जड़ें जमाए हुए है।
अध्ययन 15 जनवरी 2026 को प्रकाशित हुआ, जो अस्वास्थ्यकर भोजन की आसान पहुंच को जीवनशैली रोगों से जोड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ विकल्पों को बढ़ावा देकर इन जोखिमों को कम किया जा सकता है।