पूर्व आईपीएस अधिकारी आर एन रवि ने गुरुवार को लोक भवन में पश्चिम बंगाल के 22वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल ने उन्हें शपथ दिलाई, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उपस्थित थीं। यह नियुक्ति सी वी आनंद बोस के 5 मार्च को इस्तीफे के बाद हुई है।
आर एन रवि, जो पहले नागालैंड, मेघालय और तमिलनाडु के राज्यपाल रह चुके हैं, ने 12 मार्च 2026 को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण की। यह समारोह लोक भवन में आयोजित हुआ, जहां कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल ने शपथ दिलाई।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी, वरिष्ठ मंत्री और कोलकाता मेयर फिरहाद हकीम, तथा लेफ्ट फ्रंट के अध्यक्ष बिमान बोस उपस्थित थे। विपक्षी भाजपा के कोई नेता इस कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। वरिष्ठ नौकरशाहों में मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी भाग लिया।
रवि ने तमिलनाडु में 54 महीने का कार्यकाल पूरा किया था। बोस के इस्तीफे के बाद उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की गई। स्रोतों के अनुसार, यह परिवर्तन राज्य की राजनीतिक गतिविधियों में एक महत्वपूर्ण कदम है, हालांकि कोई विवादास्पद बयान या टिप्पणी नहीं की गई।
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल की भूमिका संवैधानिक है, जो राज्य सरकार के साथ समन्वय बनाए रखने में सहायक होती है। रवि का पूर्व अनुभव विविध राज्यों से उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त बनाता है।