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लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पराजित, परिसीमन पर विवाद
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लोकसभा ने 17 अप्रैल को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को खारिज कर दिया, जो महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने तथा परिसीमन से जुड़ा था। सरकार ने विपक्ष पर महिलाओं के साथ 'विश्वासघात' का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष ने इसे राजनीतिकरण का मामला बताया।
भारत की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, पहली महिला लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार और यूपी की पूर्व सीएम मायावती ने केंद्र सरकार के लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को तेजी से लागू करने के प्रयासों का समर्थन किया है। प्रतिभा पाटिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इसे ऐतिहासिक असमानताओं को दूर करने की दिशा में निर्णायक कदम बताया। मीरा कुमार ने 30 वर्षों से चली आ रही लड़ाई का जिक्र किया।
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सरकार गुरुवार को संसद में एक 'अनुसूची' पेश करेगी, जिसमें प्रत्येक राज्य के लोकसभा सीटों की संख्या स्पष्ट रूप से बताई जाएगी, जो वर्तमान प्रतिशत हिस्सेदारी को बनाए रखेगी। यह महिलाओं के आरक्षण और 2011 जनगणना पर आधारित परिसीमन को सुगम बनाने वाले तीन विधेयकों के साथ होगा। लोकसभा की कुल सीटें 50% बढ़कर 850 हो जाएंगी।
लोकसभा में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि 2016 से 2025 के बीच चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के दफ्तर को मौजूदा जजों के खिलाफ 8639 शिकायतें मिली हैं। इनमें 2024 में सबसे अधिक 1170 शिकायतें दर्ज हुईं। सरकार ने स्पष्ट किया कि ऐसी शिकायतों पर न्यायपालिका का इन-हाउस मैकेनिज्म लागू होता है।
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लोकसभा में गुरुवार को पास हुए विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल ने सत्तारूढ़ भाजपा को राजनीतिक हथियार दिया है, जबकि विपक्षी कांग्रेस इसे ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को समाप्त करने की कोशिश के रूप में देख रही है। कांग्रेस ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों की योजना बनाई है और दावा किया है कि यह महात्मा गांधी के नाम को मिटाने का प्रयास है।