लोकसभा ने 17 अप्रैल को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को खारिज कर दिया, जो महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने तथा परिसीमन से जुड़ा था। सरकार ने विपक्ष पर महिलाओं के साथ 'विश्वासघात' का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष ने इसे राजनीतिकरण का मामला बताया।
लोकसभा में शुक्रवार शाम को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 को आवश्यक बहुमत न मिलने से पराजित हो गया। यह विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सीटों का विस्तार कर महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने तथा परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा था। 2014 के बाद मोदी सरकार की पहली प्रमुख विधायी हार बताई जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्र को संबोधित कर विपक्षी दलों विशेषकर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके और समाजवादी पार्टी पर महिलाओं विरोधी होने का आरोप लगाया। उन्होंने शब्दों जैसे 'भ्रूण हत्या', 'पाप' और 'सजा' का प्रयोग किया तथा कांग्रेस को 'परजीवी' और ' तोड़फोड़ करने वाला' कहा।
केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलजे ने रविवार को इसे महिलाओं के लिए 'काला दिन' करार दिया तथा कांग्रेस और इंडिया गठबंधन पर दक्षिणी राज्यों और महिलाओं के साथ विश्वासघात का आरोप लगाया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष के व्यवहार की तुलना महाभारत में द्रौपदी के चीरहरण से की तथा समाजवादी पार्टी की मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग कोटा की मांग की आलोचना की।
आंध्र प्रदेश कांग्रेस समिति अध्यक्ष वाई.एस. शर्मिला ने कहा कि कांग्रेस 33 प्रतिशत कोटा के पक्ष में है लेकिन परिसीमन के बिना तत्काल कार्यान्वयन चाहती है। उन्होंने प्रधानमंत्री को 'अवसरवादी' कहा। विपक्ष ने कहा कि विधेयक में परिसीमन जोड़ना संघीय संतुलन बिगाड़ सकता है।
प्रधानमंत्री 28 अप्रैल को वाराणसी में महिला सम्मेलन को संबोधित करेंगे, जहां विपक्ष पर हमला जारी रख सकते हैं।