सरकार गुरुवार को संसद में एक 'अनुसूची' पेश करेगी, जिसमें प्रत्येक राज्य के लोकसभा सीटों की संख्या स्पष्ट रूप से बताई जाएगी, जो वर्तमान प्रतिशत हिस्सेदारी को बनाए रखेगी। यह महिलाओं के आरक्षण और 2011 जनगणना पर आधारित परिसीमन को सुगम बनाने वाले तीन विधेयकों के साथ होगा। लोकसभा की कुल सीटें 50% बढ़कर 850 हो जाएंगी।
शीर्ष सरकारी सूत्रों के अनुसार, संसद में पेश की जाने वाली अनुसूची से प्रत्येक राज्य की लोकसभा में वर्तमान प्रतिशत हिस्सेदारी बरकरार रहेगी। वर्तमान में 550 सीटों वाली लोकसभा का अधिकतम आकार 850 हो जाएगा, जिसमें राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें होंगी।
उदाहरण के तौर पर, तमिलनाडु की वर्तमान 39 सीटें (कुल का 7.2%) 57 या 58 हो सकती हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने सार्वजनिक रूप से इसकी पुष्टि की है। यह कदम दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को दूर करेगा, जहां सीएम एमके स्टालिन ने उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों के बढ़ते जनसंख्या पर सवाल उठाए हैं।
तीन विधेयक—संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026; परिसीमन विधेयक, 2026; और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026—गत सप्ताह कैबिनेट से पारित हुए हैं। ये 2011 जनगणना पर आधारित होंगे, जो 1971 के बाद पहला परिसीमन होगा। एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
संविधान संशोधन विधेयक के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जरूरी है। लोकसभा में एनडीए के 293 सदस्य हैं, जबकि राज्यसभा में उसकी ताकत 145 है। विपक्ष ने महिलाओं के आरक्षण को लोकसभा वृद्धि से जोड़ने की आलोचना की है, लेकिन प्रो-राटा वितरण से संघीय संतुलन बनेगा।