लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने गुरुवार को सदन में अपनी पहली टिप्पणी में विपक्ष के पक्षपात के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि संसदीय नियम सभी पर लागू होते हैं, यहां तक कि प्रधानमंत्री पर भी। यह बयान बुधवार को उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के असफल होने के एक दिन बाद आया।
ओम बिरला ने लोकसभा की अध्यक्षता करते हुए कहा कि उन्होंने विपक्ष द्वारा नोटिस दिए जाने के दिन सदन की कार्यवाही से दूर रहना चुना था। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री को भी भाषण देने से पहले स्पीकर से अनुमति लेनी पड़ती है। विपक्ष ने उन्हें सदन में अपनी बात रखने से रोकने के लिए पक्षपाती होने का आरोप लगाया है।
बिरला का भाषण आधे घंटे से अधिक समय चला, जिसमें उन्होंने सदन की मर्यादा बनाए रखने और विरासत में मिले नियमों का पालन करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सदस्यों को बोलने की स्वतंत्रता है, लेकिन यह निर्धारित नियमों के तहत होनी चाहिए। बुधवार को सदन में उनके खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव खारिज हो गया था।
यह घटना भारतीय संसद में बढ़ते तनाव को दर्शाती है, जहां विपक्ष स्पीकर के निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है। बिरला ने अपने कार्यों को निष्पक्ष बताया और विपक्ष के 'पक्षपाती' आरोप को अस्वीकार किया।