खनन कंपनी वेदांता ने चेन्नई की मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें तमिलनाडु सरकार से थूथुकुदी जिले में प्रस्तावित ग्रीन कॉपर प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता जांचने के लिए विशेषज्ञ पैनल गठित करने का निर्देश मांगा गया है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जनवरी में कंपनी के आवेदन को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने सरकार से 26 फरवरी तक जवाब मांगा है।
वेदांता ने बुधवार को मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें तमिलनाडु सरकार को थूथुकुदी जिले में प्रस्तावित ग्रीन कॉपर प्रोजेक्ट की अनुमति की व्यवहार्यता जांचने के लिए विशेषज्ञ पैनल गठित करने का निर्देश देने की मांग की गई। यह कदम राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (TNPCB) द्वारा कंपनी के आवेदन को 27 जनवरी को खारिज करने के कुछ दिनों बाद आया है।
स्टरलाइट कॉपर प्लांट, जो 1997 में संचालन शुरू हुआ था, ने स्थानीय निवासियों के बीच हवा और भूजल प्रदूषण तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभाव को लेकर व्यापक विरोध का सामना किया। मई 2018 में, प्लांट के विस्तार का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस फायरिंग में 13 लोगों की मौत हो गई, जिससे देशव्यापी आक्रोश फैल गया। तमिलनाडु सरकार ने उसके बाद इकाई को स्थायी रूप से बंद करने का आदेश दिया, जो बाद में अदालतों द्वारा बरकरार रखा गया और प्लांट तब से बंद है।
वेदांता का तर्क है कि बंदी से भारत की कॉपर आयात पर निर्भरता बढ़ी है और प्रस्तावित 'ग्रीन कॉपर' सुविधा उसी स्थान पर पर्यावरण अनुरूप विकल्प प्रदान करेगी। कंपनी ने कोर्ट को बताया कि नई सुविधा पुरानी स्मेल्टिंग प्रक्रियाओं से 'मौलिक रूप से अलग और भिन्न' तकनीकों पर आधारित होगी और उत्सर्जन, खतरनाक कचरे तथा स्लैग उत्पादन को कम करने के लिए पर्यावरणीय रूप से बेहतर प्रक्रियाओं को अपनाएगी।
वरिष्ठ वकील सतीश परासरन, जो वेदांता के लिए पेश हुए, ने तर्क दिया कि TNPCB ने आवेदन को मनमाने ढंग से खारिज किया, बिना पूर्व सूचना या कंपनी को सुनवाई का अवसर दिए। उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों वाले विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की। वेदांता ने स्टरलाइट प्लांट परिसर में तैयारी गतिविधियों के लिए अंतरिम अनुमति भी मांगी है।
तमिलनाडु सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता रविंद्रन ने विरोध किया कि वेदांता 'पुरानी शराब को नई बोतल में डालने' की कोशिश कर रही है और इसे 'ग्रीन कॉपर' नाम देकर नया रूप दे रही है। उन्होंने कहा कि कंपनी को TNPCB के आदेश के खिलाफ वैधानिक अपील करनी चाहिए थी, न कि हाईकोर्ट की रिट क्षेत्राधिकार का सहारा लेना। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को कंपनी द्वारा बताई गई आर्थिक चिंताओं पर प्राथमिकता देने की बात कही।