बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से फोरेंसिक प्रयोगशालाओं में 2020 से चली आ रही बैकलॉग पर रिपोर्ट मांगी है। राज्य ने अदालत को बताया कि लैबें 2020 के नमूनों की जांच कर रही हैं, जिससे नई मामलों के लिए क्षमता कम रह गई है। 2024 में दर्ज एक मामले में देरी इसी बैकलॉग के कारण हुई है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को फोरेंसिक लैबों में लंबित मामलों पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। जस्टिस शिवकुमार डिगे की अदालत में सुनवाई के दौरान राज्य ने सूचित किया कि लैबें 2020 के नमूनों की जांच में व्यस्त हैं, जिससे नई जांचों के लिए जगह नहीं बची है।
यह मामला पुणे जिले के वडगांव मावल पुलिस स्टेशन में 2024 में दर्ज हत्या केस से जुड़ा है, जिसमें मोहन शंकर तुर्डे का नाम शामिल है। अभियोजन पक्ष ने कहा कि मौजूदा मामले में देरी बैकलॉग के कारण हुई है, जिसमें सीसीटीवी फुटेज की जांच शामिल है।
राज्य सरकार को अदालत ने इस बैकलॉग के कारणों और समाधान पर विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। यह निर्देश हाल ही में जारी किया गया।