केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी रोकने के लिए अस्थायी डेबिट होल्ड और मनी लॉन्ड्रिंग कानून जैसे कई उपायों पर विचार कर रही है। अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि द्वारा जमा रिपोर्ट में इंटर-डिपार्टमेंटल कमिटी (आईडीसी) की तीसरी बैठक का जिक्र है।
केंद्र ने डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट को स्टेटस रिपोर्ट सौंपी है। इस रिपोर्ट में आरबीआई द्वारा प्रस्तावित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रक्रिया (एसओपी) का समर्थन किया गया है, जिसमें संदिग्ध खातों पर अस्थायी डेबिट होल्ड लगाने का प्रावधान है। यह मनी म्यूल गतिविधियों और साइबर धोखाधड़ी को रोकने के लिए है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आईडीसी की तीसरी बैठक 12 मार्च को गृह मंत्रालय के विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) की अध्यक्षता में हुई। इसमें प्रमुख टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं और व्हाट्सएप के साथ चर्चा की गई।
विभाग ऑफ टेलीकॉम को टेलीकॉम (यूजर आइडेंटिफिकेशन) नियमों और संबंधित अधिकृतकरण नियमों की अधिसूचना तीन महीने में तेज करने का निर्देश दिया गया है। बायोमेट्रिक आइडेंटिटी वेरिफिकेशन सिस्टम (बिवीएस) के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सिम जारी करने की दृश्यता छह महीने में सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि दिसंबर 2026 से पहले यह चालू हो।
बैठक में टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) की पॉइंट-ऑफ-सेल वेंडर्स के अनुपालन के लिए जवाबदेही, एआई आधारित धोखाधड़ी पहचान प्रणालियों को मजबूत करने, संदिग्ध कॉलिंग पैटर्न और सिम उपयोग की एनालिटिक्स तथा संदिग्ध सिम कार्ड्स को 2-3 घंटे में ब्लॉक करने की संभावना पर चर्चा हुई।