दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि शारीरिक संबंध स्थापित करने के बाद कुंडली न मिलने का हवाला देकर शादी से इनकार करना धोखे पर आधारित यौन संबंध या झूठे विवाह वादे का अपराध हो सकता है। जस्टिस स्वरना कांता शर्मा ने 17 फरवरी को एक बलात्कार मामले में आरोपी को जमानत देने से इनकार करते हुए यह टिप्पणी की।
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा कि यदि कोई पुरुष शादी का वादा करके शारीरिक संबंध स्थापित कर ले और बाद में कुंडली न मिलने का बहाना बनाकर शादी से इनकार कर दे, तो यह धोखाधड़ी या झूठे विवाह वादे पर यौन संबंध का अपराध माना जा सकता है। जस्टिस स्वरना कांता शर्मा ने 17 फरवरी को धारा 376 आईपीसी और धारा 69 बीएनएस के तहत दर्ज बलात्कार मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।
मामले में एक महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी ने लंबे समय तक संबंध में रहने और शादी का बार-बार आश्वासन देने के बाद उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। कोर्ट ने नोट किया कि आरोपी ने व्हाट्सएप चैट्स के माध्यम से कुंडलियां मिलने की पुष्टि की थी, जैसे 'कल ही शादी कर रहे हैं हम'। महिला ने पहले शिकायत वापस ले ली थी जब आरोपी और उसके परिवार ने शादी का आश्वासन दिया, लेकिन बाद में कुंडली न मिलने का हवाला देकर इनकार कर दिया।
जस्टिस शर्मा ने कहा, 'कुंडलियां न मिलने का आधार पर बाद में शादी से इनकार, पहले के आश्वासनों के बावजूद, वादे की प्रकृति और सत्यता पर सवाल उठाता है। ऐसी कार्रवाई धारा 69 बीएनएस के तहत आती है, जो धोखे या झूठे विवाह आश्वासन पर यौन संबंधों से निपटती है।' कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कुंडली मिलान इतना महत्वपूर्ण था, तो शारीरिक संबंध से पहले इसे तय करना चाहिए था। इनकार से संकेत मिलता है कि सहमति झूठे आश्वासन से प्राप्त हुई हो सकती है।
यह फैसला वैवाहिक वादों और सहमति की प्रकृति पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करता है, लेकिन कोर्ट ने भविष्य के विकास पर कोई अनुमान नहीं लगाया।