अमेरिकी प्रशासन द्वारा 30 दिनों की छूट दिए जाने के बाद पांच साल के अंतराल पर भारत-ईरान तेल व्यापार फिर शुरू हो गया है। ईरानी कच्चे तेल से लदा पिंग शुन नामक जहाज गुजरात के वाडिनार बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है। भारतीय रिफाइनरों द्वारा कच्चे तेल की कमी का सामना कर रहे समय यह डिलीवरी हो रही है।
नई दिल्ली, 31 मार्च 2026। रिसर्च एनालिस्ट सुमित रितोलिया के अनुसार, मई 2019 के बाद पहली बार ईरानी कच्चा तेल गुजरात के वाडिनार बंदरगाह की ओर जा रहा है। पिंग शुन नामक अफ्रामैक्स टैंकर करीब 6 लाख बैरल तेल लेकर मार्च की शुरुआत में खार्ग द्वीप से रवाना हुआ था। इसकी अनुमानित आगमन तिथि 4 अप्रैल है।
वाडिनार में रोसनेफ्ट समर्थित नयारा एनर्जी की 20 मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता वाली रिफाइनरी स्थित है। यह भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की बीना रिफाइनरी के लिए भी महत्वपूर्ण आपूर्ति केंद्र है। हालांकि, कार्गो का खरीदार स्पष्ट नहीं हुआ है।
पहले भारत ईरान का प्रमुख खरीदार था, जहां आयात कुल तेल का 11.5 प्रतिशत तक पहुंचा था। 2018 में प्रतिदिन 5.18 लाख बैरल आयात होता था, जो 2019 में घटकर 2.68 लाख रह गया। अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद यह बंद हो गया था।
अमेरिका ने इस महीने ईरानी तेल पर समुद्र में 30 दिन की छूट दी, जो 19 अप्रैल तक लागू है। समुद्र में 95 मिलियन बैरल ईरानी तेल है, जिसमें से 51 मिलियन भारत के लिए उपयुक्त। भुगतान चुनौती बनी हुई है, क्योंकि ईरान SWIFT से बाहर है।