हरियाणा में IDFC फर्स्ट बैंक 590 करोड़ घोटाले में चार गिरफ्तार

हरियाणा पुलिस ने IDFC फर्स्ट बैंक के चंडीगढ़ शाखा से जुड़े 590 करोड़ रुपये के घोटाले में मास्टरमाइंड समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। विजिलेंस की कार्रवाई में रिभव ऋषि, अभय कुमार, स्वाति सिंगला और अभिषेक सिंगला हिरासत में लिए गए। सरकार का दावा है कि पूरी रकम वापस वसूल ली गई है, लेकिन विपक्ष CBI जांच की मांग कर रहा है।

हरियाणा में IDFC फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा से जुड़े 590 करोड़ रुपये के घोटाले ने सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। 24 फरवरी 2026 की शाम करीब 6 बजे विजिलेंस ने मास्टरमाइंड रिभव ऋषि समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। रिभव ऋषि पहले IDFC फर्स्ट बैंक में मैनेजर थे और वर्तमान में AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में तैनात हैं। आरोप है कि उन्होंने फर्जी कंपनियां बनाकर सरकारी खातों से धन गबन की साजिश रची।

घोटाला तब सामने आया जब हरियाणा सरकार ने फरवरी 2026 में IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक को डी-एम्पैनल कर दिया और विभागों को फंड ट्रांसफर करने का निर्देश दिया। एक विभाग ने खाता बंद करने पर बैलेंस में असंगति पाई, जो शुरुआत में 490 करोड़ और बाद में 590 करोड़ तक पहुंच गई। जांच में पता चला कि फर्जी चेक और अनधिकृत ट्रांजेक्शन के जरिए पैसे अन्य खातों में स्थानांतरित किए गए थे।

बैंक ने चार कर्मचारियों को निलंबित किया, पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, RBI को सूचित किया और KPMG से फोरेंसिक ऑडिट शुरू कराया। हरियाणा सरकार ने सभी विभागों को खाते बंद करने और विजिलेंस व एंटी-करप्शन ब्यूरो को जांच सौंपी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में कहा, "सरकार ने समय रहते गड़बड़ी पकड़ ली और हर पैसा सुरक्षित वापस ले लिया गया है।"

विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने CBI जांच की मांग की, कहते हुए, "सिर्फ पैसा वापस आना काफी नहीं, जिम्मेदारों को उजागर करना चाहिए।" कांग्रेस नेता बीबी बत्रा ने भी सरकार पर सवाल उठाए। मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार राजीव जैतली ने कहा कि सरकार ने बैंक को गड़बड़ी की जानकारी दी और FIR दर्ज कराई।

घोटाले से IDFC फर्स्ट बैंक के शेयरों में 20 प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे 14,000 करोड़ का मार्केट वैल्यू नुकसान हुआ। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इसे लोकलाइज्ड मामला बताया, जो बैंकिंग सिस्टम पर व्यापक खतरा नहीं है। जांच जारी है, जिसमें फोरेंसिक ऑडिट, ट्रांजेक्शन ट्रेल और पूछताछ शामिल हैं। कुछ सरकारी कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

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