हरियाणा स्टेट विजिलेंस ब्यूरो ने पंचकूला नगर निगम द्वारा रिपोर्ट किए गए फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदों में 150 करोड़ रुपये के अंतर के बाद कोटक महिंद्रा बैंक के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। एक बैंक कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया है। बैंक ने सभी लेन-देन के नियमों का पालन करने का दावा किया है।
हरियाणा स्टेट विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसवीएसीबी) ने पंचकूला नगर निगम द्वारा कोटक महिंद्रा बैंक के सेक्टर 12 ब्रांच में फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदों (एफडीआर) में पाए गए 150 करोड़ रुपये के अंतर की शिकायत पर बैंक के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। पंचकूला के म्युनिसिपल कमिश्नर विनय कुमार ने कहा कि नगर निगम के रिकॉर्ड और बैंक के बैलेंस में अंतर पाया गया। एफआईआर पंचकूला के एसीबी पुलिस स्टेशन में बीएनएस की धाराओं 316(5), 318(4), 336(3), 338, 340 और 61 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) एवं 13(1)(ए) के तहत दर्ज हुई। बुधवार को राज्य विजिलेंस डीजी एएस चावला ने बताया कि आरोपी दिलीप कुमार राघव को गिरफ्तार किया गया, जो अपराध के समय बैंक का रिलेशनशिप मैनेजर था और नगर निगम को फर्जी रिपोर्ट भेजने का दोषी है। मंगलवार को हरियाणा सरकार ने मामले को एसवीएसीबी को सौंपा। नगर निगम के पास बैंक के साथ 16 एफडीआर हैं, जिनकी राशि 145 करोड़ रुपये है, परिपक्वता मूल्य 158 करोड़ रुपये। इनमें से 11 एफडीआर 16 फरवरी 2026 को परिपक्व हुए, जिनकी राशि 59 करोड़ थी। 16 मार्च को मिली बैंक स्टेटमेंट में 13 मार्च का बैलेंस 2.17 करोड़ रुपये दिखा, जबकि अपेक्षित 50 करोड़ था। 18 मार्च को खाते में 12 करोड़ रुपये का बैलेंस बताया गया। एफआईआर में कहा गया, “रिकॉर्ड पूरी तरह मिसमैचिंग हैं और बैंक द्वारा वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है।” वेरिफिकेशन में दो अतिरिक्त खाते मिले जो रिकॉर्ड में नहीं थे। कोटक बैंक ने बयान में कहा कि उसने विस्तृत समायोजन किया, सभी खाते और लेन-देन प्रक्रियाओं के अनुसार हैं, और वह नगर निगम, सरकार व कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहा है। बैंक ने पंचकूला पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई। पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने कहा कि इतने बड़े घोटाले के बिना आधिकारिक सांठगांठ असंभव है, उच्च स्तरीय जांच जरूरी है।